Sunday, July 30, 2017

ख़ामोशी

मन में दुनिया भर की यादें उथल पुथल कर रहीं हैं ...
कुछ बुरी कुछ भली कुछ शांत कुछ कर्कश ....
कभी आतीं हैं कभी जाती हैं .....
ज्यादातर जाने की लिए ही हैं...
जाने दो जाने दो एक बर्र फिर आने की लिए....
----नितिन स्याल

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